आंखों की चाहत अब अनजानी होने चली है || hindi love shayari || hindi kavita


 

आंखों की चाहत अब अनजानी होने चली है।

वो बरसती निगाहें अब हमारी होने चली है।

जिंदगी की मुस्किले भी रोजनी होने चली है।

ये तोशिकी भी अब पुरानी होने चली है।

चलना कहा आता है सजना बिन तुम्हारे प्यार के,

आखिर ये रास्ते भी दुश्मन हमारी होने चली है।


तुम हो तो तुम्हारा साथ भी तो चाहिए, 

गर ना हो तो अहसास ही तो चाहिए,

यही तो सहारा है तुम्हारे प्यार का , 

वो सहारे भी पुरानी होने चली है।


एहसास तुम्हारे इश्क की पुरानी होने चली है।

हर बात तुम्हारे इश्क की पुरानी होने चली है।

मिलने के दिन भी अब कहा आयेंगे,

आखिर वो रास्ते भी पुरानी होने चली है।


-मांशु सिन्हा

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